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भावों की मुट्ठी।
हम भावों की मुट्ठी केवल अनुभावों के हित खोलेंगे। अपनी चौखट के अंदर से आँखों आँखों में बोलेंगे। ना लांघे प्रेम देहरी को! बेशक़ दरवाज़े खोलेंगे...
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बेरुख़ी से तेरी मैं बिख़र जाऊंगा छूटकर आईने सा बिख़र जाऊंगा ! तुम अगर भूलसे भी भुला दोगी तो ओढ़कर तेरी यादों को सो जाऊंगा !
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'विश्वगुरु' बनने का ख़्वाब देखती मेरे देश की नई पीढ़ी को दिशा देने के लिए अभी बड़े सुधार की ज़रूरत है। हमें उनको बताना होगा कि- शान्ति, ...
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#हुलस_रहा_माँटी_का_कण_कण_उमड़_रही_रसधार_है_त्योहारों_का_देश_हमारा_हमको_इससे_प्यार_है_। भादों माह लगते ही हर दिन व्रत, पर्व, और उत्सव के रूप म...
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