Friday, March 20, 2020

सृजन के रंग

अगर स्त्री तुम न होती?
तो इस क़ायनात में कोई रंग न होता
ख़ुशी न मिलती न कोई दर्द ही रहता ।
सब कुछ निर्जीव सा बेरंग और बेज़ान होता ।
ज्ञान, श्रृंगार ,रस, निधि,जिज्ञासा,
और वैराग्य, तुमसे ही तो आता है ।

ख़ुदरंग मोहब्बत

वह दौड़कर आई और मेरे  दोनों गालों को रंग कर चली गई।
उस गुलाल की महक मेरी सांसो को महका रही है।
आज होली का पहला दिन है और वह मुझे बहका रही है।
उसकी यह ख़ुदरंग मोहब्बत मुझे
जाने कबसे अपना बना रही है ।
मन ही मन चाहने लगी थी वह जाने कबसे? सपने सजा कर बैठी थी कल के लिए उसके साथ जिसे मालूम ही नहीं कभी मुलाकात होगी भी या नहीं?
यह मोहब्बत है खुद रंग मोहब्बत अगर दिल से की जाए तो सारी कायनात उसे मिलाने में लग जाती है।
इस बार होली पर कुछ ऐसा ही हुआ-------
क्रमशः--01

डिजिटल इश्क़

अपने दिल को मेरे दिल से लिंक करलो
प्यार को दोस्ती से मिलकर सिंक करलो !
करना हो कोई बदलाव तो ओटीपी आए
मन को इस तरह से अपने मिंक करलो !
एक जमाने भर पहले देखा गया डिजिटल इंडिया का सपना सच होने लगा है।
अब तो यह इश्क और प्यार भी डिजिटल होने लगा है।
अब नहीं कबूतरों को भेजना पड़ता संदेश
अब नहीं रहता किसी को डाकिए के आने का अंदेश
यह नया युग है तकनीकी की क्रांति का
हौले हौले धीरे धीरे जीने लगती उस भ्रांति का।
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🌺💕🌺🙏🌹🙏🌺🌺🙏

प्यार का संगम होने दो

अपने सारे एहसासों को नदिया बनकर बहने दो
जो धड़कन में शोर मचा है अब तो मुझको कहने दो !
उफ़न रहा दिल में एक दरिया मिलने को बेचैन बड़ा
अपने दिल को भी जाना तुम सरिता बनकर बहने दो !
तीरथ तीरथ घुम रहा था मैं तुमसे मिलने को हमदम
अब ख़ुद को मत रोको जाना प्यार का संगम होने दो !

तन्हाई

खाली खाली दिल है मेरा और बड़ी तन्हाई है
यादें बनकर रात अंधेरी अब आंगन में छाई है !
पुरवाई चलने से देखो छुपी कसक भी जाग गई
सूनी सूनी आंखों में अब मेरी बस रुसवाई है !

तालमेल

जैसे करती है वसुधा सुबह से सायं की ओर
मुझे तय करना है सफ़ऱ जिंदगी का तेरी ओर !
जैसे अनवरत साथ रहते हैं चाँद और चकोर 
निहारते है एक दूसरे को जब तक कि न हो जाये भोर !
अपनी धुरी पर घूमकर मिलना है मुझे दूर क्षितिज पर
कि बाकी और कुछ दिखे ही नही किसी भी ओर !
रखना है तालमेल बनाकर पंछियों सा हर दम
ऊँची से ऊँची उड़ान भरकर भी भुलाते नही अपना ठोर !

Saturday, March 7, 2020

ज़हरीला ग़ुलाल

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माधुरी और दिव्या दर्द से कराह रही थी
गुलाल और रंग से उनके कपड़े और शरीर रंग गए
वो दोनों तो परीक्षा देने जा रहीं थी हाय ये क्या हुआ ?
होली के इस ज़हरीले ग़ुलाल ने उनकी पूरी साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया ।



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होली का ख़ुमार पूरे जोश पर था सब अपनी अपनी मस्ती में झूम रहे थे।
कहीं भांग वाली ठंडाई कहीं गुझियों की मिठास बिखरी हुई थी।
सब अपनी अपनी टोली बनाकर रंग खेलने में व्यस्त थे।
सब के रंग पुते चेहरे एक ही तरह से दिख रहे थे ।
कोई पहचान में नही आ रहा था तभी ....
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हुड़दंग मचाती रोहन की टोली गांव के चौराहे पर आ गई ।
अब चौराहे पर जो भी राहगीर गुजरता रोहन और उसके साथी सभी पर गुलाल और रंग फेंक कर उन्हें रंगीन कर देते।
कोई बचने की कोशिश करता तो उसके सामने आकर नरेश उसे रोक लेता पीछे से दौड़कर राजेश रंग डाल देता, तब तक रोहन भी गुलाल का ढेर उस पर उड़ेल देता ।
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यह कहानी है राजस्थान के सीकर जिले में आने वाले एक छोटे से गांव की जहाँ होली का हुड़दंग महीने भर पहले ही आरंभ हो चुका है और महीने भर बाद तक चलता रहेगा।
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माधुरी और दिव्या का आज एग्जाम है,दोनों अपने पापा के साथ पेपर देने के लिए जा रही थी।
गांव के चौराहे पर जैसे ही होली का हुड़दंग होते दिखा,पापा जी ने बाइक को रोक लिया और थोड़ी देर इंतजार किया,लेकिन जब होली के हुल्लड़ बाजो ने खेलना बन्द नहीं किया तो,बाइक स्टार्ट की और धीरे-धीरे चौराहे को पार करने लगे
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राजेश पहले से इस मौके की तलाश में था बाइक के आगे खड़ा हो गया । ब्रेक लगाते तब तक तो राजेश ने रंग का पूरा ढेर फेंक मारा और रोहन ने माधुरी और दिव्या पर ग़ुलाल उंड़ेल दिया ।
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माधुरी के पापा के हाथ से बाइक छूट गई और फिसल कर गिर पड़ी । जिससे दिव्या और माधुरी भी नीचे गिर गई।
वो चीखते हुए बोले मुझे कुछ दिख नही रहा। बचाओ ! बचाओ ! उठाओ ! कौन है ? कोई है मेरी बेटियों को बचाओ उनका पेपर दिलवा दो।
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चौराहे पर सन्नाटा पसर चुका था।
रोहन, राजेश और उसके साथी भाग खड़े हुए ।
चौराहे पर खड़ी भीड़ में से कुछ लोगों ने घायल हुए माधुरी के पापा और दोनों बेटियों को उठाया और हॉस्पिटल लेकर दौड़े ।
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डॉक्टर ने ऑपरेशन रूम से बाहर आकर नम आंखों से बोला कि मुझे माफ कीजिए अब माधुरी के पापा देख नहीं सकते....
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घायल माधुरी और दिव्या को हॉस्पिटल से मरहम पट्टी करा कर सीधे परीक्षा केंद्र पर ले जाया गया लेकिन तब तक देर हो चुकी थी पेपर छूट चुका था।
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माधुरी और दिव्या के पापा की आंखें चली गई और दोनों लड़कियों का एग्जाम नहीं हो पाया जहरीले गुलाल ने उनकी पूरी साल भर की मेहनत मिट्टी में मिला दी और पिता की आंखों की रोशनी छीन ली ।
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ज़हरीला कैमिकल युक्त हो गया आज होली का ये रंग
जाने लेकर कर रहा ये हमारी ज़िंदगानी को बेरंग।
बढ़ रहा दिनोदिन हम इंसानों के दिलों में नफरत का ज़हर
जानें लेता हुआ ये रंग मचा रहा मेरे भारत में कहर ।

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कहानी का संदेश यह है कि 👉आने वाले होली के त्योहार के पर्व पर हमें "बुरा न मानो होली है"कहकर किसी की जिंदगी के साथ खिलवाड़ नहीं करना है।
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यह कहानी हमारी टीम--- 
" ये रंग चाहतों के " होली के हमजोली प्रतियोगिता के लिए कोरा कागज़ के लिए लिखी थी जिसका श्रेय-----
कैप्टन- दिव्यांशु पाठक
सदस्य- श्वेता मिश्रा जी
          - कोमल शर्मा जी
     - डॉ सीमा शकुनि जी
          - सुधा जोशी जी
          - मैजिक वॉइस जी 
को जाता है । मैं इनका आभारी रहूँगा ।

Saturday, February 29, 2020

मेरा धौलपुर कुछ ख़ास

21 फ़रबरी 1864 
स्वामी दयानंद सरस्वती अपनी शिक्षा संपन्न कर गुरु विरजानंद जी के मथुरा स्थित आश्रम से विदा होकर "सत्य विद्या" का प्रचार प्रसार करने के लिए पहली बार बाहर निकले थे वह आगरा बिना रुके ही धौलपुर आये और प्रसिद्ध शिवजी के चौपड़ा मंदिर पर आकर प्रथम उद्बोधन दिया ।
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यह अपने आप में एक अनोखी घटना थी कि लोगों के सामने भविष्य का एक असाधारण इंसान खड़ा था किन्तु ये धौलपुर वाले ना ग़ज़ब हैं ।
स्वामीजी को बिल्कुल भी गम्भीरतापूर्वक नही लिया और मज़ाक़ बना दिया इसी कारण क्रुद्ध होकर वह कह गए कि #धौलपुर" में तो धूल ही धूल है और चले गए आर्यसमाज की स्थापना की और मृत्युपर्यन्त तक धौलपुर लौटकर नही आये ।
😊
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ये धौलपुर वाले भी क़माल हैं 1947 में पूरा देश आज़ादी का जश्न मना रहा था और यहां के राजा उदयभान सिंह अपना स्वतंत्र राज्य चलाने के चक्कर में थे अलग रियासत के रूप में किन्तु धौलपुर की जनता अब भी ग़ज़ब है बैसे ही तब भी अजब थी उनके दिलों में भी आज़ादी का शोर चरम पर था इसलिए अपने राजा का ही विद्रोह कर #तिरंगा लहरा दिया ।
इतिहास में यह दिन देश के आखिरी सैनिक विद्रोह के रूप में अंकित हो गया ।
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22 फ़रबरी 1948 को तीसरा सैनिक विद्रोह धौलपुर में हुआ
1946 मुम्बई में दूसरा हुआ
1857 में पहला सैनिक विद्रोह हुआ जिसे सब जानते हैं ।
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देश का यह आख़री सैनिक विद्रोह अभी तक इतिहास के अंदर छुपा हुआ था जो इस बार निकल आया और राजस्थान GK का एक शानदार प्रश्न बन गया है ।
आपको यह जानकारी कैसी लगी मुझे जरूर बताएं आपसे फिर मुलाक़ात होगी इसी के साथ नमस्कार मित्रो भाई बहनों और ...😁समझ ही गए होंगे👻👻🍫🍁🍁😁😁😁जाते जाते एक बात और -----
यह सैनिक विद्रोह तीन दिन चला और सरदार वल्लभ भाई पटेल के हस्तक्षेप से सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया उसके बाद उन लोगों पर कोर्टमार्शल की कार्यवाही हुई और धौलपुर रियासत राजस्थान में विलय हो गई ....

भाव

भक्ति में शबरी हो जाना वात्सल्य में सूर
प्रेम बाबरी मीरा बनकर सबकुछ जाना भूल
राधा का अनुराग अनूठा विरह सहित अनुकूल
मन मंदिर तन तीर्थ बनाकर जाना ईश्वर मूल !
कविताएं कुण्ठित होती तो क्या मन के भाव दिखाई देते ?
पढ़कर सुनकर पाठक श्रोता फ़िर न ऐसे मुग्ध हो जाता !
अगर कवि पूर्वाग्रह करता तो क्या कोई ग्रंथ बनाता ?
इतिहासों के अमिट फ़लक पर फ़िर ना वह अंकित हो पाता !

साथिया

दोस्ती और इश्क़ का शानदार आगाज़ है 
ये तो तमाम रिश्तों की जानदार आवाज़ है !
"साथिया" महज़ एक जज़्बाती शब्द ही नहीं
रूह में वफ़ाओं को शामिल कर लेने का रियाज़ है !

भावों की मुट्ठी।

 हम भावों की मुट्ठी केवल अनुभावों के हित खोलेंगे। अपनी चौखट के अंदर से आँखों आँखों में बोलेंगे। ना लांघे प्रेम देहरी को! बेशक़ दरवाज़े खोलेंगे...