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भावों की मुट्ठी।
हम भावों की मुट्ठी केवल अनुभावों के हित खोलेंगे। अपनी चौखट के अंदर से आँखों आँखों में बोलेंगे। ना लांघे प्रेम देहरी को! बेशक़ दरवाज़े खोलेंगे...
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चाँदनी आज रूठी है क्यों चाँद से ये अंधेरा फिज़ाओ में जोरों से है धड़कनें बढ़ रहीं नींद भी है नही ख्वाब भी रूठ बैठे मेरी आंख से ! कुछ तो हुआ इन ...
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प्रथम वैदिक सेनानी (भारत का स्वतंत्रता संग्राम 1845 ई. से 30 अक्टूबर 1883) ♦️♦️♦️♦️♦️♦️♦️ पृष्ठभूमि 1500 से 1000 ईसा पूर्व 🔻 स...
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बेरुख़ी से तेरी मैं बिख़र जाऊंगा छूटकर आईने सा बिख़र जाऊंगा ! तुम अगर भूलसे भी भुला दोगी तो ओढ़कर तेरी यादों को सो जाऊंगा !
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