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भावों की मुट्ठी।
हम भावों की मुट्ठी केवल अनुभावों के हित खोलेंगे। अपनी चौखट के अंदर से आँखों आँखों में बोलेंगे। ना लांघे प्रेम देहरी को! बेशक़ दरवाज़े खोलेंगे...
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दोस्ती और इश्क़ का शानदार आगाज़ है ये तो तमाम रिश्तों की जानदार आवाज़ है ! "साथिया" महज़ एक जज़्बाती शब्द ही नहीं रूह में वफ़ाओं को शाम...
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'विश्वगुरु' बनने का ख़्वाब देखती मेरे देश की नई पीढ़ी को दिशा देने के लिए अभी बड़े सुधार की ज़रूरत है। हमें उनको बताना होगा कि- शान्ति, ...
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चाँदनी आज रूठी है क्यों चाँद से ये अंधेरा फिज़ाओ में जोरों से है धड़कनें बढ़ रहीं नींद भी है नही ख्वाब भी रूठ बैठे मेरी आंख से ! कुछ तो हुआ इन ...
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