फ़ूल और फ़ल प्राप्त करने के लिए पौधा लगाना ही पर्याप्त नही है क्योंकि उसके वृक्ष होने तक पोषण और सरंक्षण की सतत ज़रूरत होती है !
हम भावों की मुट्ठी केवल अनुभावों के हित खोलेंगे। अपनी चौखट के अंदर से आँखों आँखों में बोलेंगे। ना लांघे प्रेम देहरी को! बेशक़ दरवाज़े खोलेंगे...
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